पुलित्जर विजेता युद्ध संवाददाता पीटर अर्नेट नहीं रहे

वाशिंगटन। खलीलियह युद्ध संवाददाता पीटर अर्नेट नहीं रहे। वैश्विक पत्रकारिता के सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार विजेता अर्नेट ने न्यूयॉर्क बीच शहर में 91 वर्ष की आयु में बुधवार को अंतिम सांस ली। उन्होंने अपने जीवनकाल में वियतनाम के धान के खेतों से लेकर इराक के रेगिस्तान तक दुनिया को युद्ध की आंखों देखी कहानियां दिखाईं।

पीटर अर्नेट का सफर

  • 1966 में अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता
  • उसी बेटे एंड्रू अर्नेट ने बताया कि अंतिम समय पर उनके आसपास दोस्त और परिवार के लोग थे
  • पीटर कैंसर से पीड़ित होने के कारण उन्हें शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था
  • उन्होंने 1962 से 1975 तक युद्ध कवर किया

वियतनाम से रिपोर्टिंग 1991 में पहली खाड़ी युद्ध के दौरान सीएनएन के लिए लाइव आउटडोर प्रस्तुति करने के बाद वह घर-घर में जाना-पहचाना नाम बन गए। अर्नेट एपी में इंडोनेशिया के संवाददाता के तौर पर शामिल होने के ठीक एक साल बाद वियतनाम पहुंचे। वह 1975 तक वियतनाम में रहे। अर्नेट 1981 तक एपी के साथ रहे। इसके बाद सीएनएन का हिस्सा बन गए। इस साल बाद वह बगदाद में एक और युद्ध को कवर करने पहुंचे। उन्होंने न केवल अमेरिका मोर्चे की लड़ाई की रिपोर्टिंग की, बल्कि तत्कालीन राष्ट्रपति सद्धाम हुसैन और ओसामा बिन लादेन के विश्वासपात्र इंटरव्यू भी किया। अर्नेट ने 1999 में सीएनएन छोड़ दिया। उन्होंने 2003 में एनबीसी और नेशनल ज्योग्राफिक के लिए दूसरे खाड़ी युद्ध को कवर किया। अर्नेट ने ताइवान, संयुक्त अरब अमीरात और बेल्जियम के स्टेशनों के लिए भी काम किया। 2007 में उन्होंने चीन की शांती यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म पढ़ाने की नौकरी कर ली।

2014 में रिटायरमेंट के बाद वह और उनकी पत्नी, नीना गुयेन, दक्षिणी कैलिफोर्निया के फाउंटेन वैली अभयारण्य में चले गए।

युद्ध की सच्चाई को दुनिया के सामने लाने वाले इस महान संवाददाता को सलाम! पीटर अर्नेट – पत्रकारिता का एक युग खत्म हुआ।

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