एजेंसी, नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार की आपत्तियों के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद जारी रखी है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर महीने में रूस से 2.5 बिलियन डॉलर ($2.5 billion, लगभग $22.17 हजार करोड़ रुपये) मूल्य का कच्चा तेल आयात करने के साथ, भारत दुनिया में रूसी क्रूड ऑयल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
📊 आयात के आँकड़े
CREA के डेटा के मुताबिक, अक्टूबर में:
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चीन 🇨🇳 अभी भी रूसी फॉसिल फ्यूल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। चीन ने कुल 3.7 बिलियन डॉलर ($32.82 हजार करोड़ रुपये) के ईंधन का आयात किया।
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भारत 🇮🇳 कुल मिलाकर, रूस से फॉसिल फ्यूल आयात में 3.1 बिलियन डॉलर ($27.49 हजार करोड़ रुपये) का रहा, जिसमें क्रूड ऑयल आयात का बड़ा हिस्सा शामिल है।
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भारत के बाद, तुर्की 🇹🇷 ने 5.8 बिलियन डॉलर ($51.44 हजार करोड़ रुपये) के तेल का आयात किया।
अमेरिकी प्रतिबंधों का असर दिसंबर में दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत और चीन अभी भी रूसी तेल खरीदते रहे हैं।
🌍 अन्य बड़े खरीदार
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रूसी ऑयल प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा खरीदार: तुर्की, जो कुल 957 मिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात कर चुका है। इसमें लगभग आधा डीजल शामिल है।
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रूसी गैस का सबसे बड़ा खरीदार: यूरोपीय संघ (EU) ने अक्टूबर में 824 मिलियन डॉलर मूल्य की रूसी गैस और पाइपलाइन गैस का आयात किया, और 31.1 मिलियन डॉलर मूल्य का कच्चा तेल खरीदा।
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रूसी कोयला और LNG के खरीदार: चीन पिछले महीने रूस से कोयले का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जो भारत और तुर्की से आगे निकल गया। चीन ने 760 मिलियन डॉलर का कोयला खरीदा। वहीं, भारत ने अक्टूबर में 351 मिलियन डॉलर मूल्य का रूसी कोयला और 222 मिलियन डॉलर मूल्य के ऑयल प्रोडक्ट इम्पोर्ट किए।
📉 अमेरिकी सैंक्शंस का संभावित असर
पश्चिमी देश भारत और चीन पर रूसी तेल की खरीद पर दबाव बना रहे हैं, क्योंकि उनका तर्क है कि इससे यूक्रेन में रूस के युद्ध को फंडिंग मिल रही है।
हालांकि, अमेरिका ने रूस के दो शीर्ष तेल निर्यातकों, रोसनेफ्ट और लुकोइल, पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन प्रतिबंधों का असर भारत और चीन के रूसी तेल और गैस के आयात पर दिसंबर से दिखाई दे सकता है।