सत्रों की अवधि कम होने पर मायावती ने जताई चिंता

लिखा— गंभीर विषय, सरकार और विपक्ष करें विचार

संवाददाता
लखनऊ

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं के सत्रों की अवधि लगातार कम होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे एक गंभीर विषय बताते हुए सरकार और विपक्ष दोनों से इस पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश में संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्रों का समय लगातार घटता जा रहा है, जिससे जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर समुचित चर्चा नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि सत्रों के घटते समय के कारण जनता की समस्याओं, कानून-व्यवस्था, महंगाई, रोजगार और विकास जैसे विषयों पर चर्चा प्रभावित होती है।

बसपा प्रमुख ने लिखा कि हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से सरकारी मान्यता न मिलने के कारण मदरसा बोर्ड को बंद करने का कोई आधार नहीं बताया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे विषयों पर भी सदन में गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मायावती ने कहा कि संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन होनी चाहिए, ताकि लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके और जनता की आवाज़ प्रभावी ढंग से सदन तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन के लिए सभी दलों को सहयोग की भावना से काम करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों की यह जिम्मेदारी है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखें और सदनों को केवल राजनीतिक टकराव का मंच न बनाएं। जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

मायावती की इस टिप्पणी को मौजूदा राजनीतिक माहौल में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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