‘साहब, पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना है…’ श्रुति की बात सुन डीएम ने दिखाई संवेदनशीलता

14 वर्षीय दिव्यांग बालिका को एक घंटे में वॉकर उपलब्ध कराने के निर्देश, उसी दिन स्कूल में दाखिले और पढ़ाई की सामग्री देने के आदेश

संवाददाता
उरई/जालौन

उरई। “साहब, पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना है…” 14 वर्षीय दिव्यांग बालिका श्रुति के इन शब्दों ने जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों का ध्यान खींचा। शिक्षा के प्रति उसकी लगन और डॉक्टर बनने के सपने को देखते हुए जिलाधिकारी समीर ने तत्काल मदद के निर्देश दिए। डीएम ने एक घंटे के भीतर वॉकर उपलब्ध कराने, उसी दिन विद्यालय में दाखिला दिलाने और पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री मुहैया कराने के आदेश दिए।

शुक्रवार को जिलाधिकारी समीर अपने कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी बीच उरई के पाठकपुरा निवासी भगत सिंह अपनी 14 वर्षीय दिव्यांग बेटी श्रुति को लेकर पहुंचे। पिता ने बताया कि आवागमन में परेशानी के कारण उनकी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है। उन्होंने श्रुति के लिए वॉकर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

शिक्षा में बाधा नहीं बनने देंगे सुविधाओं की कमी

बालिका की पढ़ाई बाधित होने की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने श्रुति से बातचीत कर उसकी पढ़ाई और भविष्य के सपने के बारे में पूछा। इस पर बालिका ने उत्साह से कहा कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है। उसकी इच्छा जानने के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

स्कूल में दाखिला और पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने के आदेश

जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि श्रुति का उसी दिन विद्यालय में दाखिला कराया जाए। साथ ही स्कूल यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, नोटबुक सहित पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसकी शिक्षा दोबारा शुरू हो सके।

वहीं, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी को एक घंटे के भीतर वॉकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, जिससे श्रुति को आवागमन में सुविधा हो और वह नियमित रूप से विद्यालय जा सके।

डॉक्टर बनने के सपने को मिली नई उम्मीद

श्रुति की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि दिव्यांगता किसी बच्चे के सपनों और शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। उचित सहयोग और अवसर मिलने से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिलता है। जनसुनवाई में सामने आई समस्या पर जिलाधिकारी की पहल से श्रुति की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने की दिशा में कदम उठाया गया। अब बालिका को उम्मीद है कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखकर एक दिन डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर सकेगी।

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