संवाददाता
कानपुर देहात
जल जीवन मिशन के अंतर्गत “हर घर नल–हर घर जल” योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के समाज कार्य विभाग द्वारा जनपद के विभिन्न गांवों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया। इस अध्ययन में इंजुआ रामपुर, शाही, गढ़ी महेरा, मुंडेरा किन्नर सिंह सहित 8 ब्लॉकों के 15 गांवों को शामिल किया गया।
सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य पेयजल उपलब्धता, जल आपूर्ति की नियमितता, समुदाय की भागीदारी एवं जल गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं का मूल्यांकन करना था। अध्ययन के दौरान पाया गया कि कई गांवों में घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से पेयजल की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। विशेष रूप से महिलाओं को पानी लाने में लगने वाला समय कम हुआ है, जिससे उन्हें अन्य कार्यों एवं बच्चों की देखभाल के लिए अधिक समय मिल पा रहा है।
विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से बच्चों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव देखा गया। कई स्थानों पर गांव जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) की सक्रियता से योजना के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है।
हालांकि अध्ययन के दौरान कुछ समस्याएं भी सामने आईं। कई गांवों में जल टंकियों का संचालन नियमित न होने से आपूर्ति बाधित हो रही है। जल सखियों की निष्क्रियता के कारण जागरूकता गतिविधियां अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहीं। कुछ घरों में टूटी टोंटियों के कारण जल अपव्यय की स्थिति भी देखी गई। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में जल गुणवत्ता एवं क्लोरीनेशन की व्यवस्था कमजोर पाई गई। साही गांव में जल टंकी का कार्य अधूरा पाया गया, जिसे शीघ्र पूरा करने का आश्वासन अधिकारियों ने दिया है।
कार्यकारी संस्थाओं आईएचपीसीएल (IHPCL) एवं जीवीपीआर (GVPR) ने संचालन एवं रखरखाव में सुधार की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
सर्वेक्षण टीम में मुख्य सर्वेक्षक डॉ. किरन झा, सह-सर्वेक्षक डॉ. सत्य प्रकाश वर्मा सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। वहीं संबंधित विभागीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि तकनीकी व प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद योजना को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं तथा सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाएगा।