संवाददाता
कानपुर देहात
उप कृषि निदेशक, कानपुर देहात हरीशंकर भार्गव ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित एवं योजनाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भारत सरकार की “एग्रीस्टैक” योजना के अंतर्गत किसान पहचान पत्र (Farmer ID) अनिवार्य कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि जनपद में जिन किसानों के पास अभी तक किसान पहचान पत्र नहीं है, उनके लिए 06 से 15 अप्रैल 2026 तक विशेष शिविर (कैंप) आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत 10 अप्रैल 2026 को ग्राम गेंजूमऊ मजरा बनवारीपुरवा एवं ग्राम रहनियापुर (विकासखंड अकबरपुर) का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा भी की गई।
किसानों से अपील की गई है कि वे 15 अप्रैल तक अपने नजदीकी कैंप या जनसेवा केंद्र पर पहुंचकर किसान पहचान पत्र अवश्य बनवा लें, ताकि उन्हें खाद, बीज एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कोई समस्या न हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें केवल उन्हीं किसानों को दी जाएंगी, जिनके पास किसान पहचान पत्र होगा। इसके साथ ही कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता एवं सिंचाई विभाग की सभी योजनाओं का लाभ भी इसी पहचान पत्र के आधार पर मिलेगा।
मई 2026 से सब्सिडी वाले खाद, बीज एवं कीटनाशकों का वितरण भी केवल “फार्मर रजिस्ट्री” में पंजीकृत किसानों को ही किया जाएगा। इसके लिए पोर्टल को एग्रीस्टैक से जोड़ा जा रहा है।
भविष्य में गेहूं, धान, दालें और सरसों जैसी फसलों की सरकारी खरीद के लिए भी किसान पहचान पत्र अनिवार्य होगा। खरीद केंद्रों पर इस आईडी का सत्यापन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों को घटना की सूचना 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर देना अनिवार्य है।
किसान यह सूचना लिखित रूप से बीमा कंपनी के जिला समन्वयक या कृषि विभाग के संबंधित कार्यालयों में भी दे सकते हैं, जिससे समय पर सत्यापन कराकर उन्हें क्षतिपूर्ति का लाभ दिलाया जा सके।