ओलावृष्टि पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, डीएम ने संभाली कमान; खेतों तक पहुंचा तंत्र शाम से ही शुरू हुआ सर्वे, हर नुकसान का होगा पारदर्शी आकलन—किसानों को राहत का भरोसा

संवाददाता
उरई/जालौन

शनिवार शाम अचानक बदले मौसम ने जनपद में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के साथ भारी तबाही मचाई। इस आपदा से जालौन, माधौगढ़, कुठौंद, कोंच और नदीगांव क्षेत्र के लगभग 30 गांवों में खड़ी एवं कटी फसलें प्रभावित हुई हैं। गेहूं और चना की तैयार फसलें सबसे अधिक नुकसान की चपेट में आईं, जहां कई खेतों में फसलें जमीन पर बिछ गईं, वहीं कटी हुई फसल भी भीगकर खराब हो गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने तत्काल प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया। अपर जिलाधिकारी संजय कुमार, एसडीएम हेमंत पटेल एवं एसडीएम वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता के साथ उन्होंने स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर आवश्यक निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने राजस्व एवं कृषि विभाग की टीमों को निर्देशित किया कि फसल क्षति का सर्वे शनिवार शाम 6 बजे से ही प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। साथ ही फसल बीमा कंपनियों को भी निर्देश दिए गए कि वे शीघ्र नुकसान का आकलन कर किसानों को लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

कुठौंद और माधौगढ़ क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है, जबकि जालौन और कोंच तहसीलों में आंशिक क्षति सामने आई है। मदनेपुर, गोरा राठौर, सलैया, चटसारी, दावर और ऊंचा गांव सहित कई गांव इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी किसान को नुकसान के आकलन में उपेक्षित नहीं किया जाएगा। विशेष रूप से बटाई एवं बलकट पर खेती करने वाले किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खेत मालिकों से सहमति पत्र लेकर ऐसे किसानों को भी मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रत्येक प्रभावित किसान की फसल का शत-प्रतिशत आकलन कर शासन स्तर से शीघ्र राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही निर्देश दिए गए कि यदि किसी प्रकार की जनहानि या पशु हानि की सूचना मिलती है, तो 24 घंटे के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।

जिला प्रशासन की त्वरित सक्रियता और जमीनी स्तर पर किए जा रहे सर्वे कार्य से किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस आपदा की घड़ी में किसी भी प्रभावित किसान को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

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